Emotional
एआई के दौर में इंसान
मशीनें अब हमारे सवालों के जवाब देती हैं, मगर रात के डर को कौन समझाता है? लफ़्ज़ तो अब पलक झपकते मिल जाते हैं, मगर किसी अपने का एहसास कहाँ से लाया जाता है? दुनिया समझदार होती जा रही है, फिर इंसान को इंसान समझना इतना मुश्किल क्यों है?
— Ketan · Shayarana with Ketan
© Shayarana with Ketan
19 October 2026
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Emotional
ख़ुद से शिकायत
मैं सबको समझता रहा उम्र भर, मुझे समझने की किसी ने कोशिश न की। मैं हर किसी के लिए मौजूद रहा, मेरी ख़ामोशी की किसी ने ख़बर न ली।
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मैंने हर किसी को अपना दर्द नहीं बताया, कुछ लोग मरहम कम, कहानी ज़्यादा बनाते हैं।
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कभी-कभी इंसान रोता नहीं, बस बदल…
कभी-कभी इंसान रोता नहीं, बस बदल जाता है, और दुनिया उसके बदलने को उसका घमंड समझ लेती है।
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