तुम्हारा होना
तुम्हें चाहना कोई आदत नहीं थी मेरी, ये वो बात थी जो ख़ुद से भी छुपाई मैंने। तुम दूर हुए तो पता चला मुझको, कितनी दुनिया तुम्हारे नाम पर बसाई मैंने।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan

Alfaaz Mere, Ehsaas Aapke
Kuch Alfaaz Dil Se...
Har shayari ke peeche ek kahani, har lafz mein ek ehsaas.
Aaj ki shayari
तुम्हें चाहना कोई आदत नहीं थी मेरी, ये वो बात थी जो ख़ुद से भी छुपाई मैंने। तुम दूर हुए तो पता चला मुझको, कितनी दुनिया तुम्हारे नाम पर बसाई मैंने।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
Naye alfaaz
वो दोस्त है जो मेरी ख़ामोशी पढ़ लेता है, मेरी झूठी हँसी में भी कमी पकड़ लेता है। दुनिया पूछती है, तुम्हारे पास है क्या, मैं कहता हूँ—एक दोस्त है, जो मुझे मुझसे बेहतर समझ लेता है।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →तेरे हाथ में हाथ हो, कोई मंज़िल न हो, बातें हों हज़ार, मगर कोई मुश्किल न हो। बस चलते रहें हम किसी अनजान सड़क पर, और वक़्त को शिकायत हो कि शाम इतनी जल्दी क्यों ढली।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →मैं हारकर भी अपने इरादों में ज़िंदा हूँ, अभी मंज़िल नहीं मिली, मगर रास्तों में ज़िंदा हूँ।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →रात ने आज फिर मुझसे पुराना सवाल किया, जिसे भूलना था, उसे याद क्यों किया? मैंने चाँद की तरफ़ देखकर इतना ही कहा, दिल है साहब, इसने कब किसी का कहा किया?
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →मैंने इश्क़ को किसी वादे में नहीं बाँधा, तेरे होने को किसी इरादे में नहीं बाँधा। तू मेरी हो या न हो, ये अलग बात है, मैंने तुझे कभी अपने फ़ायदे में नहीं बाँधा।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →हमारी कहानी का आख़िरी पन्ना ही नहीं था, तेरे जाने का कोई बहाना भी नहीं था। मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ एक सवाल लिए, क्या तुझे मुझसे प्यार था, या बस अकेलापन था?
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →Mood ke hisaab se
मोहब्बत की शायरी
Mohabbat ke alfaaz
दर्द भरी शायरी
Udaasi ke pal
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Rumaani ehsaas
अधूरी मोहब्बत की शायरी
Toote dil ki baatein
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ज़िंदगी की शायरी
Zindagi ke sabak
मोटिवेशनल शायरी
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परिवार और माँ-बाप की शायरी
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Do lafzon mein poori baat
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Kavita ki duniya
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Aaj ki zubaan mein
तन्हाई की शायरी
धोखा और बदलते रिश्ते
उम्मीद और ख़्वाब
ख़ुद से मोहब्बत और आत्मचिंतन
Lekhak
Sabse zyada padhi gayi
रात भर चाँद से बातें करता रहा, वो भी मेरी तरह कुछ कह न सका। मैं अपने ही सवालों में उलझा रहा, कोई मेरे भीतर तक उतर न सका।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →तुम्हें चाहना कोई आदत नहीं थी मेरी, ये वो बात थी जो ख़ुद से भी छुपाई मैंने। तुम दूर हुए तो पता चला मुझको, कितनी दुनिया तुम्हारे नाम पर बसाई मैंने।
© Shayarana with Ketan
Poori shayari padhein →अब किसी से अपने दुख का हिसाब क्या माँगूँ, लोग चेहरे पढ़ते हैं, ख़ामोशी नहीं। मैंने हर बार हँसकर बात टाल दी, मेरी आँखों ने मगर कोई बात छुपाई नहीं।
© Shayarana with Ketan
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