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Romantic

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तेरे हाथ में हाथ हो, कोई मंज़िल न हो,

तेरे हाथ में हाथ हो, कोई मंज़िल न हो, बातें हों हज़ार, मगर कोई मुश्किल न हो। बस चलते रहें हम किसी अनजान सड़क पर, और वक़्त को शिकायत हो कि शाम इतनी जल्दी क्यों ढली।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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