Romantic
तेरे हाथ में हाथ हो, कोई मंज़िल न हो,
तेरे हाथ में हाथ हो, कोई मंज़िल न हो, बातें हों हज़ार, मगर कोई मुश्किल न हो। बस चलते रहें हम किसी अनजान सड़क पर, और वक़्त को शिकायत हो कि शाम इतनी जल्दी क्यों ढली।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
20 October 2026
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नमूना: चाँद की बातें
तेरी यादों का चाँद हर रात आता है, ख़ामोशी में भी कोई गीत गुनगुनाता है।
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तुम पास बैठो तो शाम ठहरने…
तुम पास बैठो तो शाम ठहरने लगती है, जैसे वक़्त को भी हमारी बातें सुननी हों।
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तेरे बालों में उलझी हवा से…
तेरे बालों में उलझी हवा से कहना, मेरे हिस्से की ख़ुशबू भी वहीं छोड़ जाए।
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