तन्हाई की शायरी
ऑनलाइन दुनिया, ऑफ़लाइन दर्द
हर रोज़ हज़ार चेहरों से मुलाक़ात होती है, फिर भी रात को ख़ुद से बात नहीं होती है। हमने दुनिया को अपनी ख़ुशियों के सबूत दिए, मगर अपने दुख की कभी पोस्ट नहीं होती है। अजीब दौर है—सबको हमारी ख़बर रहती है, बस हमें ही अपनी हालत की ख़बर नहीं होती है।
— Ketan · Shayarana with Ketan
© Shayarana with Ketan
19 October 2026
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अकेला होना
अकेला हूँ, मगर ये कोई शिकायत नहीं, हर भीड़ में अपना मिलना ज़रूरी तो नहीं। कुछ रास्ते ख़ुद के साथ चलने पड़ते हैं, हर सफ़र में किसी का होना ज़रूरी तो नहीं।
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Poori shayari padhein →मेरे कमरे की ख़ामोशी
रात भर चाँद से बातें करता रहा, वो भी मेरी तरह कुछ कह न सका। मैं अपने ही सवालों में उलझा रहा, कोई मेरे भीतर तक उतर न सका।
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Poori shayari padhein →अकेलेपन की आदत
अब अपनी बात ख़ुद से कह लेता हूँ, दिल भारी हो तो चुपचाप सह लेता हूँ। लोग पूछते हैं इतने ख़ामोश क्यों हो, मैं मुस्कुराकर हर सवाल टाल देता हूँ।
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