तन्हाई की शायरी
अकेला होना
अकेला हूँ, मगर ये कोई शिकायत नहीं, हर भीड़ में अपना मिलना ज़रूरी तो नहीं। कुछ रास्ते ख़ुद के साथ चलने पड़ते हैं, हर सफ़र में किसी का होना ज़रूरी तो नहीं।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
15 October 2026
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तन्हाई की शायरी
मेरे कमरे की ख़ामोशी
रात भर चाँद से बातें करता रहा, वो भी मेरी तरह कुछ कह न सका। मैं अपने ही सवालों में उलझा रहा, कोई मेरे भीतर तक उतर न सका।
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अकेलेपन की आदत
अब अपनी बात ख़ुद से कह लेता हूँ, दिल भारी हो तो चुपचाप सह लेता हूँ। लोग पूछते हैं इतने ख़ामोश क्यों हो, मैं मुस्कुराकर हर सवाल टाल देता हूँ।
© Shayarana with Ketan
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तन्हाई में सबसे ज़्यादा शोर यादों…
तन्हाई में सबसे ज़्यादा शोर यादों का होता है, कमरा ख़ामोश हो तो दिल पुरानी बातें सुनाता है।
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