Skip to content
तन्हाई की शायरी

तन्हाई की शायरी

मेरे कमरे की ख़ामोशी

रात भर चाँद से बातें करता रहा, वो भी मेरी तरह कुछ कह न सका। मैं अपने ही सवालों में उलझा रहा, कोई मेरे भीतर तक उतर न सका।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

15 October 2026

Aur bhi padhiye