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दर्द भरी शायरी

दर्द भरी शायरी

दर्द का हिसाब

अब किसी से अपने दुख का हिसाब क्या माँगूँ, लोग चेहरे पढ़ते हैं, ख़ामोशी नहीं। मैंने हर बार हँसकर बात टाल दी, मेरी आँखों ने मगर कोई बात छुपाई नहीं।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

15 October 2026

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