मोहब्बत की शायरी
तुम्हें चाहना मेरे लिए कोई फ़ैसला नहीं था,
तुम्हें चाहना मेरे लिए कोई फ़ैसला नहीं था, ये वो सफ़र था जिसका कोई रास्ता नहीं था। मैं तुम्हारे साथ उम्र भर चलने निकला था, मुझे क्या पता, तुम्हारे दिल में मेरा पता नहीं था।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
20 October 2026
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मोहब्बत की शायरी
तुम्हारा होना
तुम्हें चाहना कोई आदत नहीं थी मेरी, ये वो बात थी जो ख़ुद से भी छुपाई मैंने। तुम दूर हुए तो पता चला मुझको, कितनी दुनिया तुम्हारे नाम पर बसाई मैंने।
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दिल की बात
तुम्हारी आँखों में कुछ ऐसा ठहर जाता हूँ, जैसे कोई मुसाफ़िर घर पहुँच गया हो। तुमसे बात करके ये एहसास होता है, कि दिल भी कभी ख़ुद से मिल गया हो।
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तुम्हें चाहना मेरी ज़िंदगी का सबसे…
तुम्हें चाहना मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत जुर्म था, सज़ा भी उम्रभर मिली, मगर गुनहगार होने का ग़म नहीं।
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