धोखा और बदलते रिश्ते
बदलते लोग
कल तक जो मेरी बातों में ख़ुशी ढूँढ़ते थे, आज उन्हें मेरा हाल सुनना गँवारा नहीं। वक़्त ने रिश्तों की तस्वीर कुछ यूँ बदली, अब कोई अपना भी पहले-सा हमारा नहीं।
— Ketan · Shayarana with Ketan
© Shayarana with Ketan
16 October 2026
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धोखा और बदलते रिश्ते
पहचान
मैंने लोगों को वक़्त के साथ बदलते देखा, अपने ही वादों से पलटते देखा। जिन्हें अपनी दुआओं में रखा था कभी, उन्हें मेरी ख़ामोशी पर हँसते देखा।
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मतलब के रिश्ते
जब तक ज़रूरत थी, हम याद आते रहे, काम निकल गया तो अजनबी कहलाते रहे। हम रिश्तों को दिल से निभाते रहे, वो रिश्तों में अपना फ़ायदा गिनाते रहे।
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उसने झूठ बोला तो दुख हुआ…
उसने झूठ बोला तो दुख हुआ, मगर ज़्यादा दुख इस बात का था— मैंने उसके सच पर कभी शक ही नहीं किया।
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