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धोखा और बदलते रिश्ते

धोखा और बदलते रिश्ते

मतलब के रिश्ते

जब तक ज़रूरत थी, हम याद आते रहे, काम निकल गया तो अजनबी कहलाते रहे। हम रिश्तों को दिल से निभाते रहे, वो रिश्तों में अपना फ़ायदा गिनाते रहे।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

15 October 2026

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