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उम्मीद और ख़्वाब

उम्मीद और ख़्वाब

जो आज तेरे हाथों से फिसल गया,

जो आज तेरे हाथों से फिसल गया, ज़रूरी नहीं वो आख़िरी मौक़ा था। कभी-कभी बंद दरवाज़े के पीछे, तेरे लिए कोई बेहतर रास्ता इंतज़ार करता है।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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