उम्मीद और ख़्वाब
जो आज तेरे हाथों से फिसल गया,
जो आज तेरे हाथों से फिसल गया, ज़रूरी नहीं वो आख़िरी मौक़ा था। कभी-कभी बंद दरवाज़े के पीछे, तेरे लिए कोई बेहतर रास्ता इंतज़ार करता है।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
20 October 2026
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उम्मीद और ख़्वाब
एक छोटी-सी उम्मीद
अभी रात है तो सुबह भी आएगी, थकी हुई आँखों में रोशनी भी आएगी। तू अपने ख़्वाबों का दामन मत छोड़, किसी दिन तेरी मेहनत रंग भी लाएगी।
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अँधेरा देखकर सूरज पर शक मत…
अँधेरा देखकर सूरज पर शक मत करना, हर सुबह को आने में पूरी रात लगती है।
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मेरे ख़्वाबों का घर अभी बना…
मेरे ख़्वाबों का घर अभी बना नहीं है, मगर मैंने उसकी चाबी हार के हवाले नहीं की।
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