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दो लाइन की शायरी

दो लाइन की शायरी

हमने ख़्वाबों को हक़ीक़त समझकर सँभाला था,

हमने ख़्वाबों को हक़ीक़त समझकर सँभाला था, वक़्त ने आँख खोली तो हाथ ख़ाली था।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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