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ज़िंदगी की शायरी

ज़िंदगी की शायरी

ज़िंदगी कोई दौड़ नहीं जिसमें सबको…

ज़िंदगी कोई दौड़ नहीं जिसमें सबको पीछे छोड़ना है, कभी अपने टूटे हुए हिस्सों को भी साथ लेकर चलना है।

— Ketan · Shayarana with Ketan

© Shayarana with Ketan

19 October 2026

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