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तन्हाई की शायरी

तन्हाई की शायरी

मेरे कमरे की खिड़की हर शाम…

मेरे कमरे की खिड़की हर शाम खुलती है, शायद हवा को भी लगता है, मैं किसी का इंतज़ार करता हूँ।

— Ketan · Shayarana with Ketan

© Shayarana with Ketan

19 October 2026

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