धोखा और बदलते रिश्ते
मैंने तुम्हें खोया, ये कहानी का एक हिस्सा है,
मैंने तुम्हें खोया, ये कहानी का एक हिस्सा है, तुमने भरोसा खोया, ये भी कम क़िस्सा नहीं है। तुम किसी और के साथ ख़ुश रहो, मुझे मंज़ूर, पर मेरे सच्चे होने को मेरी कमज़ोरी मत कहना।
— शायराना विद केतन
© Shayarana with Ketan
20 October 2026
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धोखा और बदलते रिश्ते
पहचान
मैंने लोगों को वक़्त के साथ बदलते देखा, अपने ही वादों से पलटते देखा। जिन्हें अपनी दुआओं में रखा था कभी, उन्हें मेरी ख़ामोशी पर हँसते देखा।
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मतलब के रिश्ते
जब तक ज़रूरत थी, हम याद आते रहे, काम निकल गया तो अजनबी कहलाते रहे। हम रिश्तों को दिल से निभाते रहे, वो रिश्तों में अपना फ़ायदा गिनाते रहे।
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बदलते लोग
कल तक जो मेरी बातों में ख़ुशी ढूँढ़ते थे, आज उन्हें मेरा हाल सुनना गँवारा नहीं। वक़्त ने रिश्तों की तस्वीर कुछ यूँ बदली, अब कोई अपना भी पहले-सा हमारा नहीं।
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