Skip to content
परिवार और माँ-बाप की शायरी

परिवार और माँ-बाप की शायरी

पिता ने अपने शौक़ों को अक्सर टाल दिया,

पिता ने अपने शौक़ों को अक्सर टाल दिया, मेरी छोटी-सी ख़ुशी पर सब कुछ वार दिया। मैं कामयाबी के पीछे इतना दूर निकल गया, ये पूछना भूल गया—उन्होंने अपना ख़्वाब कब जी लिया?

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

Aur bhi padhiye