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परिवार और माँ-बाप की शायरी

परिवार और माँ-बाप की शायरी

माँ के हाथों की रोटी में स्वाद से ज़्यादा प्यार था,

माँ के हाथों की रोटी में स्वाद से ज़्यादा प्यार था, उसकी हर डाँट के पीछे मेरा ही ख़याल था। अब दुनिया भर के पकवान चख लिए मैंने, पर उस पुराने घर जैसा सुकून कहाँ था?

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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