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परिवार और माँ-बाप की शायरी

परिवार और माँ-बाप की शायरी

घर सिर्फ़ दीवारों और छत का नाम नहीं होता,

घर सिर्फ़ दीवारों और छत का नाम नहीं होता, हर अपना हर वक़्त पास हो, ये भी ज़रूरी नहीं होता। जहाँ लौटकर इंसान अपना बोझ उतार सके, उससे बड़ा दुनिया में कोई मुक़ाम नहीं होता।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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