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ज़िंदगी की शायरी

ज़िंदगी की शायरी

उम्र बढ़ी तो पता चला, आसान कुछ भी नहीं,

उम्र बढ़ी तो पता चला, आसान कुछ भी नहीं, हर मुस्कान के पीछे परेशान कुछ न कुछ यहीं। जो कल तक दूसरों को हिम्मत दिया करते थे, आज उन्हें भी चाहिए कोई कहे—तुम अकेले नहीं।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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