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तन्हाई की शायरी

तन्हाई की शायरी

कमरे में रखी कुर्सी अब भी ख़ाली रहती है,

कमरे में रखी कुर्सी अब भी ख़ाली रहती है, जैसे किसी के लौटने की गवाही देती है। मैंने घर की हर चीज़ अपनी जगह रख दी, बस यादों की अलमारी बंद नहीं होती है।

— शायराना विद केतन

© Shayarana with Ketan

20 October 2026

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