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परिवार और माँ-बाप की शायरी

परिवार और माँ-बाप की शायरी

माँ के नाम

माँ ने अपनी नींद से मेरी सुबहें खरीदीं, मैं बड़ा हुआ तो उसकी रातों का हिसाब भूल गया।

— Ketan · Shayarana with Ketan

© Shayarana with Ketan

19 October 2026

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